Business Ideas: बच्चे हो या बूढ़े खिलौना एक मात्र ऐसा वस्तु हैं जिसे हर कोई खेलना पसंद करता हैं। इसलिए खिलौने की डिमांड 12 माह तक रहती हैं क्योंकि हर किसी के घर में छोटा बच्चा तो जरूर ही होता हैं। यदि आप खिलौने का बिजनेस स्टार्ट करे तो महीने की कमाई लाखो तक हो सकती हैं। क्योंकि दिल्ली के सदर मार्केट में खिलौने इतने सस्ते रेट पर मिलते हैं कि आप सोच भी नहीं सकते हैं।
दिल्ली के सदर मार्केट से व्होलसेल रेट पर खिलौने खरीदे और उसे रिटेल में दुगने दामों पर बेचे और अपना खुद का बिजनेस स्टार्ट करें। चलिए जानते हैं कि कैसे व्होलसेल से खिलौने खरीदे और रिटेल में बेचकर पैसे कमाएं ?
Wholesale रेट पर खिलौने कहां से खरीदे ?
दिल्ली का सदर बाजार एशिया की नंबर वन मार्केट हैं जहां आपको कोई भी सामना इतने सस्ते रेट पर मिलेगा कि आप सोच कर हैरान हो जाएंगे।
अब बात करते हैं कि खिलौने यानी बच्चों का खेलना वाला सामान का बिजनेस के लिए खिलौने कैसे लें ? दिल्ली के सदर बाजार में मिठाई पुल के नीचे आपको कुछ ऐसे खिलौने की दुकान मिलेगी, जो व्होलसेल रेट पर खिलौने बेचते हैं जैसे Eagle Toys, Krishna Toys, Fantom Toys, Geeta Toys और super kids toys इत्यादि। ये सारी दुकानें आपको व्होलसेल रेट पर खिलौने उपलब्ध करवाती हैं।
ये सारी दुकानें अपनी-अपनी कैटलॉग बना रखा हैं जहां आप डायरेक्ट सामान का ऑर्डर दे सकते हैं और आपका ऑर्डर पेमेंट होने के बाद आपको सौप दिया जाएगा।
खिलौने के बिज़नेस में कितनी पूंजी चाहिए ?
खिलौनों का बिज़नेस आप बहुत कम पूंजी से भी शुरू कर सकते हैं। अगर आप छोटे लेवल पर शुरुआत करना चाहते हैं, तो ₹10,000 से ₹15,000 में सदर बाजार से साधारण खिलौने जैसे गेंद, गुड़िया, सीटी, छोटे कार और पजल खरीद सकते हैं। इससे आप लोकल मार्केट या ठेले पर बिक्री कर सकते हैं। अगर आप थोड़े बड़े लेवल पर काम करना चाहते हैं, तो ₹50,000 से ₹1 लाख तक की पूंजी में बैटरी वाले और एजुकेशनल खिलौने ले सकते हैं, जिनका मुनाफा ज्यादा होता है। सही प्लानिंग से कम पूंजी में भी अच्छा प्रॉफिट कमाया जा सकता है।
कौन-कौन से खिलौने ज्यादा बिकते हैं ?
खिलौने के बिज़नेस में सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आप सही डिमांड वाले खिलौने चुनते हैं या नहीं। 0 से 3 साल के बच्चों के लिए रंग-बिरंगे रैटल, सॉफ्ट टॉय और म्यूजिक टॉय ज्यादा बिकते हैं। 4 से 8 साल के बच्चों में कार, बाइक, गुड़िया, किचन सेट और गन टॉय की मांग रहती है। इसके अलावा बैटरी से चलने वाले खिलौने और एजुकेशनल टॉय जैसे पजल, ब्लॉक्स और लर्निंग बोर्ड हर समय चलते हैं। कार्टून कैरेक्टर वाले खिलौने बच्चों को जल्दी आकर्षित करते हैं, इसलिए इनकी सेल हमेशा अच्छी रहती है।
रिटेल में खिलौने कहां बेचें ?
खिलौने का बिज़नेस तभी अच्छा चलता है जब आप सही जगह पर बिक्री करें। लोकल मार्केट, सब्ज़ी मंडी के पास या किराना दुकानों के बाहर खिलौने आसानी से बिक जाते हैं। स्कूल, कोचिंग सेंटर और पार्क के आसपास खिलौनों की डिमांड हमेशा बनी रहती है। आप ठेले या छोटे स्टॉल से भी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। इसके अलावा मेले, हाट बाजार और त्योहारों के समय खिलौनों की बिक्री तेजी से बढ़ जाती है। आज के समय में WhatsApp, Facebook और Instagram के जरिए ऑनलाइन भी खिलौने बेचकर अच्छी कमाई की जा सकती है।
खिलौनों पर कितना मुनाफा होता है ?
खिलौनों के बिज़नेस में मुनाफा काफी अच्छा होता है क्योंकि व्होलसेल और रिटेल रेट में बड़ा फर्क होता है। दिल्ली के सदर बाजार से जो खिलौना ₹50 में मिलता है, वही खिलौना रिटेल में आसानी से ₹100 से ₹150 में बिक जाता है। आमतौर पर खिलौनों पर 50% से लेकर 100% तक का प्रॉफिट मार्जिन होता है। अगर आप रोज़ाना ₹2,000 की बिक्री करते हैं, तो ₹800 से ₹1,000 तक की बचत हो सकती है। सही लोकेशन और सही प्रोडक्ट चुनने पर महीने की कमाई ₹30,000 से ₹1 लाख तक भी पहुंच सकती है।
खिलौने बेचने के लिए लाइसेंस चाहिए या नहीं ?
अगर आप छोटे लेवल पर खिलौनों का बिज़नेस शुरू कर रहे हैं, जैसे ठेला, फुटपाथ या छोटी दुकान, तो शुरुआत में किसी खास लाइसेंस की जरूरत नहीं होती। लेकिन जैसे-जैसे आपका बिज़नेस बढ़ता है और आपकी सालाना बिक्री तय सीमा से ज्यादा हो जाती है, तब GST रजिस्ट्रेशन जरूरी हो जाता है। अगर आप पक्की दुकान खोलते हैं, तो दुकान रजिस्ट्रेशन और नगर निगम की अनुमति लेनी पड़ सकती है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेचने के लिए GST अनिवार्य होता है। शुरुआत में छोटे स्तर पर काम करके बाद में सभी जरूरी रजिस्ट्रेशन कराना बेहतर रहता है।
खिलौनों की पैकिंग और सेफ्टी नियम
खिलौनों का बिज़नेस करते समय बच्चों की सेफ्टी का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। हमेशा ऐसे खिलौने चुनें जो मजबूत हों और आसानी से टूटते न हों। छोटे बच्चों के लिए नुकीले किनारों वाले या बहुत छोटे पार्ट्स वाले खिलौने नहीं बेचने चाहिए। आजकल कई खिलौनों पर BIS सर्टिफिकेशन होता है, जो उनकी क्वालिटी और सेफ्टी को दिखाता है। पैकिंग सही और साफ-सुथरी होनी चाहिए ताकि ग्राहक को भरोसा मिले। अच्छी पैकिंग से खिलौना खराब होने से बचता है और बिक्री भी बढ़ती है।
खिलौने का बिज़नेस बढ़ाने के तरीके
अगर आप खिलौनों के बिज़नेस को आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो हमेशा नए और ट्रेंडिंग खिलौनों पर नजर रखें। बच्चों में चल रहे कार्टून, फिल्म और गेम्स के कैरेक्टर वाले खिलौने जल्दी बिकते हैं। थोक में ज्यादा मात्रा में खरीदने पर रेट कम पड़ता है, जिससे मुनाफा बढ़ता है। पुराने ग्राहकों को दोबारा लाने के लिए उन्हें डिस्काउंट या फ्री छोटा खिलौना दे सकते हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर अपने खिलौनों की फोटो डालकर और लोकल प्रचार करके बिज़नेस को तेजी से बढ़ाया जा सकता है।
आम गलतियां जो नए लोग करते हैं
नए लोग खिलौनों का बिज़नेस शुरू करते समय कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं, जिनसे नुकसान हो सकता है। सबसे बड़ी गलती बिना डिमांड समझे ज्यादा स्टॉक खरीद लेना है, जिससे माल फंस जाता है। कई लोग लो क्वालिटी खिलौने ले आते हैं, जो जल्दी टूट जाते हैं और ग्राहक दोबारा नहीं आता। सही लोकेशन न चुनना भी एक बड़ी गलती है, क्योंकि गलत जगह पर बिक्री नहीं होती। इसके अलावा कीमत बहुत ज्यादा या बहुत कम रखना भी नुकसानदायक हो सकता है। सही जानकारी और प्लानिंग से इन गलतियों से बचा जा सकता है।
खिलौने के बिज़नेस से जुड़े फायदे और नुकसान
खिलौनों का बिज़नेस करने के कई फायदे हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि खिलौनों की डिमांड पूरे साल बनी रहती है और बिक्री ज्यादातर कैश में होती है। कम पूंजी से शुरुआत करके अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। वहीं कुछ नुकसान भी हैं, जैसे ट्रेंड बदलते ही कुछ खिलौने बिकना बंद हो जाते हैं। सस्ते खिलौने टूटने का रिस्क रहता है और बच्चों की सेफ्टी को लेकर सावधानी जरूरी होती है। सही प्लानिंग से फायदे ज्यादा और नुकसान कम किए जा सकते हैं।
Disclaimer: यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें बताई गई कमाई, लागत और मुनाफा जगह, समय और मेहनत के अनुसार कम-ज्यादा हो सकता है। बिज़नेस शुरू करने से पहले खुद रिसर्च करें और जरूरत पड़े तो किसी जानकार से सलाह जरूर लें। लेखक किसी भी नुकसान या लाभ की जिम्मेदारी नहीं लेता।